February 6, 2026

राष्ट्रीय संगोष्ठी में जुटे देश भर के भूगोलविद

रायपुर
भूगोल अध्ययनशाला पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के तत्वावधान में गुरुवार को 41वें भारतीय भूगोलविद सम्मेलन एवं आपदा प्रतिरोध सक्षम समाज का निर्माण विधियां एवं उपागम विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में देश के 11 राज्यों के भूगोलविद् शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञों की सहभागिता रही। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. के सुब्रमण्यम सदस्य राज्य योजना आयोग रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. के एल वर्मा ने की।

विभिन्न प्रकार के आपदा से संबंधित क्षेत्रीय और स्थानीय मुद्दों के निहितार्थ आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल भुवनेश्वर उत्कल युनिवर्सिटी के गोपाल कृष्ण पंडा ने छत्तीसगढ़ से बातचीत के दौरान बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र तट के आसपास रहवासियों के लिए नए सिरे से प्रबंधन की आवश्यकता है। समुद्र के पानी के तटीय क्षेत्र के पानी से मिलने के कारण खेती से लेकर अन्य तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं। मछुआरों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बदलते समय और जलवायु परिवर्तन के साथ वर्तमान में इंटीग्रेटेड कोस्टल मैनजमेंट की जरुरत है।

विश्व भारती शांति निकेतन के प्रो. वी सी झा ने बताया कि 21 वीं सदी में भौगोलिक मैपिंग की तकनीक में बदलाव आया है। जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी पर केंद्रित भौगोलिक मैप आपदा के पुवार्नुमान, रेस्क्यू में मददगार हो सकते हैं। सम्मेलन में शामिल राजस्थान की डॉ. सरीना कालिया हाल में साभर झील में सैकड़ों प्रवासी पक्षियों की मौत पर चिंता जाहिर करते हुए कहती हैं सांभर झील से नमक बनाने के लिए छोटे-छोटे पॉकेट इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। राजस्थान में अवैध खनन की समस्या गंभीर है। राजस्थान में बिल्डिंग स्टोन के अवैध खनन के कारण पशुओं की जान जा रही है। इस ओर ध्यान देने की जरुरत है।