राममय होगा अब छत्तीसगढ़, वन गमन के दौरान गुजरे जगहों को सरकार करेंगी संरक्षित
रायपुर
अयोध्या में रामलला के पक्ष में आए फैसले की खुशी अभी लोग भुला भी नहीं पाये थे कि छत्तीसगढ़ सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। वनवास काल के दौरान भगवान राम राज्य के जिन जगहों से होकर गुजरे थे उन जगहों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। जिसमें सरगुजा व बस्तर जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र भी शामिल हैं।
प्रथम चरण में राज्य सरकार ने सरगुजा से लेकर बस्तर के बीच स्थित आठ स्थलों का चयन किया है। इनमें सीतामढ़ी (कोरिया), रामगढ़ ( सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चाँपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंद्रखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा (धमतरी) और जगदलपुर (बस्तर) शामिल हैं।
उपरोक्त प्रस्तावित 8 स्थलों का चार विभागीय सदस्यों की टीम बनाकर सर्वे कराया जाकर आवश्यकता के अनुसार पहुंच मार्ग का उन्नयन, साईनेजेस, पर्यटक सुविधा केन्द्र, इंटरप्रिटेशन सेंटर, वैदिक विलेज, पगोड़ा वेटिंग शेड मूलभूत सुविधा (पेयजल व्यवस्था/शौचालय) सीटिंग बेंच, रेस्टोरेंट वाटर फ्रंट डेव्हलपमेंट विद्युतीकरण आदि का विकास किया जाएगा। राम वनगमन मार्ग में आने वाले स्थलों में से चंद्रखुरी तहसील आरंग जिला रायपुर जहां माता कौशल्या जी का मंदिर स्थित है। से इन कार्यों का शुभारंभ किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही प्रशस्त है। त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कौसल एवं दंडककारण्य के रूप में वि यात था। दंडकारण्य में ागवान श्रीराम के दमगमन यात्रा की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है। शोधकतार्ओं के शोध किताबों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभु श्रीराम के द्वारा अपने वनवास काल के 14 वर्षो में से लगभग 10 वर्ष से अधिक समय छत्तीसगढ़ में व्यतीत किया गया था।
