मोक्षदा एकादशी का क्या है महत्व, इस विधि से पूजा करने पर मिलेगा वरदान
नई दिल्ली
मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को आती है. इस दिन को मोक्ष प्राप्ति का दिन कहा जाता है. इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था. आज के दिन पूजा उपासना से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति सम्भव होती है. इस दिन दान का फल अनंत गुना मात्र में प्राप्त होता है.
मोक्षदा एकादशी पर करें ये उपाय
– प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें
– इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान कृष्ण की पूजा करें.
– उन्हें पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें
– इसके बाद भगवान कृष्ण के मन्त्रों का जप करें
– या भगवद्गीता का पाठ करें
– किसी निर्धन व्यक्ति को वस्त्रों या अन्न का दान करें
– वैसे तो निर्जल उपवास रखना उत्तम होता है
– परन्तु आवश्यकता होने पर जलीय आहार और फलाहार लिया जा सकता है
गीता जयंती का क्या महत्व है?
– मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था
– इसी दिन को गीता जयंती के नाम से मनाया जाता है.
– गीता मात्र एक पुस्तक नहीं है बल्कि यह उपदेशों का जीवंत स्वरुप है अतः इसकी जयंती मनाई जाती है.
– इसके उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पूर्व में थे अतः हर काल में जीवंत होने के कारण भी इसकी जयन्ती मनाई जाती है.
– इस दिन गीता के पाठ से मुक्ति मोक्ष और शान्ति का वरदान मिलता है
– गीता के पाठ से जीवन की ज्ञात अज्ञात समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है
इस विधि से करें पूजा
– एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं
– इस पर भगवान कृष्ण की स्थापना करें
– लाल या पीले कपडे में लपेट कर गीता की नई प्रति भी स्थापित करें
– फल , मिष्ठान्न और पंचामृत अर्पित करें
– इसके बाद श्री कृष्ण के मन्त्रों का जाप करें
– फिर गीता का सम्पूर्ण पाठ करें या अध्याय 11 का पाठ करें
– गीता जी की आरती कहें
– अपनी कामनापूर्ति की प्रार्थना करें
