शराब की दुकानें खुलेंगी तो क्या गन्ने का रस या गाय का दूध बिकेगा: पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज
भोपाल
मुख्यमंत्री कमलनाथ के पत्र पर आज सुबह फिर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार पर शराब की नई दुकानें खोलने को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पत्र में बताए तर्क से वे संतुष्ट नहीं है। ये गले उतरने वाले नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शराब की दुकानें खुलेंगी तो क्या गन्ने का रस या गाय का दूध बिकेगा। शिवराज सिंह चौहान के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने पलटवार किया है।
शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने शासकीय बंगले पर पत्रकार वार्ता में कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा था। इसके बाद कमलनाथ ने उन्हें जवाब दिया। इस पत्र में जो तर्क दिए गए हैं, वे गले उतरने वाले नहीं है। यदि माफियाओं को खत्म करने का यह तरीका है तो प्रदेश में इतना बड़ा आबकारी अमला क्यों बनाया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पत्र में मेरे कार्यकाल की भी बात की गई है। 2005 अंत में सीएम बना, 2011 में मैंने फैसला लिया कि प्रदेश में शराब की नई दुकानें नहीं खुलेंगी। विभाग के लोग आते थे, 300-400 नई दुकान खोलने के प्रस्ताव लेकर, लेकिन मैंने एक नई दुकान नहीं खोली। आबकारी आयुक्त का पत्र इस बात की पुष्टि करता है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक टीम बना रखी है जो मेरे कुछ कहते ही कुतर्क शुरू कर देती है।
इधर मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि माफिया किसके राज में पनने उन्हें संरक्षण किसकी सरकार ने दिया, प्रदेश की जनता सब जानती है। अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने के प्रदेश सरकार के उपाय पर इसलिए ही शिवराज सिंह चौहान बेचैन है। वे चाहते हैं कि प्रदेश में उनके शासन की ही तरह अवैध शराब बिके ताकि माफिया पनपता रहे।
गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा था कि भाजपा सरकार ने एक भी नई दुकानें नहीं खोलीं। बल्कि यह नीति बनाई की धीरे-धीरे शराब की दुकाने कम हो। इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए लिखा था कि भाजपा शासन में 2003-04 में 2221 शराब दुकानें थीं। जो 2010-11 में 2770 हो गई। विदेशी शराब की दुकानें 581 से बढ़कर 916 हो हुई।
