उद्यम क्रांति में 25 % युवाओं को भी नहीं दिया लोन, अफसरों का मार्च माह का रोका वेतन

भोपाल

मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना की शर्तों और इसको लेकर बैंकों द्वारा लोन मंजूर किए जाने में होने वाली आनाकानी का असर अब जिला उद्योग केंद्र पर पड़ रहा है। राज्य शासन ने उन सभी जिला व्यापार और उद्योग केंद्रों के अफसरों और तृतीय श्रेणी कैडर तक के कर्मचारियों के मार्च माह के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है जहां इस योजना के केस स्वीकृति और राशि वितरण की प्रोग्रेस 17 मार्च की स्थिति में 25 प्रतिशत से कम है। महाप्रबंधकों को दिए निर्देश में कहा गया है कि उद्योग संचालनालय की अनुमति के बाद ही वेतन आहरित किया जा सकेगा।

जिला व्यापार और उद्योग केंद्र के प्रदेशके सभी महाप्रबंधकों को दिए निर्देश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में  25% से अधिक प्रगति करने वाले जिलों के वेतन आहरण की अनुमति एमएसएमई संचालनालय देगा। इसी माह संचालक एमएसएमई द्वारा जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्रों के महाप्रबंधकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में इस योजना की समीक्षा की गई थी। इसमें कहा गया था कि ऐसे जिले जिनमें मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के हितग्राहियों को राशि वितरण की प्रगति 25% से कम है

उनके कार्यालय का माह फरवरी का वेतन (चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी एवं वाहन चालकों को छोड़कर) उद्योग संचालनालय की अनुमति के उपरांत ही आहरित होगा। इसके परिप्रेक्ष्य में जिन जिलों द्वारा 25% से अधिक प्रगति दर्ज कर ली गयी है उन्हें वेतन आहरण की अनुमति प्रदान की जाती है। जिन जिलों में वितरण की प्रगति 25% से कम है तथा जिनके द्वारा फरवरी माह के वेतन का आहरण कर लिया गया था उन्हें माह मार्च का वेतन (चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी एवं वाहन चालकों को छोड़कर) उद्योग संचालनालय की अनुमति के उपरांत ही मिल सकेगा।

इन जिलों की परफार्मेंस 25 प्रतिशत से कम
जिन जिलों को 25 प्रतिशत से कम परफार्मेंस में चिन्हित किया गया है उसमें पन्ना, रायसेन, बैतूल, झाबुआ, बड़वानी, छतरपुर, नीमच, सतना, भिंड, बुरहानपुर शामिल हैं। इसके साथ ही टीकमगढ़, अशोकनगर, सिंगरौली, अनूपपुर, सीधी, बालाघाट, दतिया, निवाड़ी,अलीराजपुर और श्योपुर का भी परफार्मेंस कमजोर है और ये जिले भी मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में 25 प्रतिशत के कम वितरण वाले जिलों में शामिल हैं। इनका परफार्मेंस एक साल में 24.57 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच है।

जब से शुरू हुई तब से पटरी पर नहीं आ सकी योजना
यह योजना जब से शुरू हुई है तभी से युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण देने में फेल रही है। स्थिति यह रही है कि इस योजना की बार-बार लांचिंग के बाद भी न तो योजना में युवाओं को अपेक्षित लाभ मिल पा रहा है और न ही इसकी शर्तों के आधार पर बैंक ऋण स्वीकृत करने में रुचि दिखा रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि अब अफसरों पर एक्शन लिया जा रहा है।

 

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