भोजशाला ASI सर्वे को लेकर दोनों पक्षों के पास अपने-अपने तर्क!मुस्लिम पक्ष ने फिर जताई आपत्ती

धार

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला वर्सेस कमाल मौला मस्जिद परिसर में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा सर्वे कार्य किया जा रहा है। सर्वे के 23वें दिन शनिवार को पुरातत्व विभाग की 21 सदस्यीय टीम 29 मजदूरों के साथ भोजशाला परिसर में पहुंची। बता दें कि कल से भोजशाला परिसर के पीछे 3 साइट पर और गर्भगृह के पास खुदाई का काम चल रहा है। भोजशाला में अभी तक 22 दिन के सर्वे के दौरान सीढ़ियां, दीवार, शिलालेख, पत्थरों के भित्त चित्र और अकल कुइया के पास सर्वे किया जा चुका है। भोजशाला के पीछले हिस्से में सर्वे लगातार जारी है।

इसी के साथ टीम द्वारा भोजशाला में बने खम्बों की भी मैपिंग की जा रही है। गुंबद की मैपिंग भी चल रही है। क्लीनिंग ब्रशिंग की गई है। मिलने वाले सभी शिलालेख और पत्थरों की सफाई कर उनके फोटो वीडियो लेकर उनकी क्लीनिंग कर नंबरिंग कर कोडिंग देकर पैक कर लिया गया है। अब उन्हें लैब भेजा जाएगा। आने वाले दिनों में सर्वे के लिए और नई विधाओं के साथ जीपीएस और जीपीआर मशीन का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसी के साथ पत्थरों की कार्बन डेटिंग भी करवाई जाएगी।

मुस्लिम पक्ष को कुछ मामलों पर आपत्ती

मुस्लिम पक्षकार अब्दुल समद ने कहा कि अब तक के सर्वे से वो संतुष्ट है, लेकिन कुछ मामलों में उन्होंने आपत्ती दर्ज कराई है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक, ऐसी जगह खुदाई नहीं की जानी चाहिए, जिससे किसी मोनुमेंट को नुकसान पहुंचे। लेकिन दरगाह के पास खुदाई की जा रही है। बाबा की दरगाह के पास किसी का भी जाना माना है। बाबा की मजार है, दरगाह है, वो अपने आप में सम्माननीय हैं। असल दरगाह नीचे है। उसमें एक तलघर है। हम लोग उन्हें ये बता चुके हैं।

ASI टीम को कराया गया तलघर विजिट

अब्दुल समद का कहना है कि बाबा की दरगाह तलघर में है। पुरातत्व टीम को वहां विजिट कराई जा चुकी है। आने वाले दिनों में और भी विजिट करवाई जाएगी। वहां से जो शिलालेख निकले हैं, जो चीजें निकली है। वो मुस्लिम पक्ष की हैं। जो भाषा में लिखा हैं, उसके लिए साइंस की टीम यहां पर जुड़ने वाली है। वहीं हिंदू पक्ष के गोपाल शर्मा ने कहा कि सर्वे की असल जरूरत भोजशाला में नहीं, बल्कि दरगाह परिसर में है।

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