ब्रांड डील से रील्स तक, अब हर कमाई पर देना होगा टैक्स, इंफ्लुएंसर पर नया प्रोफेशनल कोड लागू

भोपाल 

सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर फेमस होना, यूट्यूब पर वीडियोज से लाखों की कमाई करना या इंस्टाग्राम पर ब्रांड प्रमोशन से पैसा कमाना अब सिर्फ लाइक्स और फॉलोअर्स का खेल नहीं रहा. अगर आप भी डिजिटल दुनिया से कमाई कर रहे हैं, तो अब सरकार की नजर भी आप पर है. आयकर विभाग ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स और ट्रेडर्स के लिए आईटीआर फाइलिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है.

आप भी सोशल मीडिया पर रील बनाकर पैसे कमाते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। अब सरकार आपके हर लाइक्स व ब्रांड डील (Brand Deals) पर टैक्स लेगी। आयकर विभाग ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर (content creators) की कमाई को ट्रैक करने के लिए नया प्रोफेशनल कोड 16021 (New professional code) लागू किया है। इसके लागू होते ही प्रदेश के 300 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर आयकर की रडार पर आ गए हैं।

अब तक उन्हें कंपनियां टीडीएस काटकर रुपए देती थी। लेकिन पहली बार अब इनकम टैक्स रिटर्न भी भरना होगा। बताते हैं, मप्र में रील, सोशल मीडिया पर ब्रांडिंग करने वालों की संख्या दो हजार तक जा सकती है। सीए पंकज शर्मा ने कहा, बदलते समय में यह जरूरी है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म की आइटीआर-3 या आइटीआर-4 में दर्ज

नए कोड के तहत, ब्रांड प्रमोशन, प्रोडक्ट बेचने या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट बनाने से होने वाली आय को आइटीआर-3 या आइटीआर-4 फॉर्म में स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य है। धारा 44 एडीए में अनुमानित आय पर टैक्स छूट लेने के लिए आइटीआर-4 फॉर्म भरना होगा। यदि सालाना प्रोफेशनल इनकम 50 लाख रुपए से कम है, तो 50 फीसदी आय यानी 25 लाख पर टैक्स लगेगा। जिनकी आय 50 लाख से अधिक है तो उन्हें 25 लाख पर टैक्स तो देना होगा। खर्च का ऑडिट भी कराना होगा।

आयकर को नहीं पता चलता था कमाई का स्रोत

अब तक कुछ इन्फ्लुएंसर आयकर रिटर्न को अन्य प्रोफेशनल कैटेगरी में भरते थे। इससे विभाग को उनका पेशा पता करने में दिक्कत होती थी। कमाई का स्रोत भी पता नहीं चलता था। 2020 तक देश में करीब 10 लाख इंफ्लुएंसर्स थे। 2024 में यह बढ़कर करीब 40 लाख से ज्यादा हो गए।
देश के टॉप इंफ्लुएंसर

    केरी मिनाटी- 21.3 मिलियन
    भुवन बाम – 20.8 मिलियन
    अमित भड़ाना- 9.8 मिलियन
    प्रजकता कोली- 8.8 मिलियन
    जाकिर खान- 7.8 मिलियन

मप्र के टॉप इंफ्लुएंसर्स

    पायल धरे- 4 मिलियन
    नमन देशमुख- 3.6 मिलियन
    ऋत्विक धनजानी- 3 मिलियन
    तान्या मित्तल- 2.8 मिलियन

अब कौन भरेंगे ITR-3 या ITR-4?
अब तक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अन्य प्रोफेशनल कैटेगरी में आईटीआर भरते थे, जिससे उनकी आय का वर्गीकरण ठीक से नहीं हो पाता था. लेकिन अब यदि आप यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक या अन्य किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म से ब्रांड प्रमोशन, डिजिटल कंटेंट या विज्ञापन से पैसा कमा रहे हैं, तो आपको ITR-3 या ITR-4 फॉर्म में नया कोड 16021 चुनना होगा.

टैक्स कितना देना होगा?
टैक्स का गणित आपकी सालाना आय पर निर्भर करता है. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी अब प्रोफेशनल्स की तरह माने जाएंगे. अगर आपकी प्रोफेशनल इनकम सालाना 50 लाख से कम है, तो 44ADA के तहत आप अनुमानित 50% इनकम पर ही टैक्स दे सकते हैं. इससे टैक्स का बोझ कम हो सकता है.

क्यों जरूरी है यह बदलाव?
सरकार का मकसद है कि डिजिटल पेशों से होने वाली आय पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड हो. इसके अलावा टैक्स चोरी की संभावनाएं भी कम हों. सोशल मीडिया से कमाई करने वालों के लिए यह बदलाव एक अलार्म की तरह है. 

अगर आप अपनी कमाई पर धारा 44ADA के तहत अनुमानित आय के आधार पर टैक्स देना चाहते हैं, तो आपको ITR-4 फॉर्म भरना होगा. लेकिन अगर आपकी आय कॉम्प्लिकेटेड है और प्रोफेशनल एकाउंटिंग करते हैं, तो ITR-3 जरूरी होगा.

और भी पेशों के लिए जोड़े गए नए कोड
* कमीशन एजेंट- 09029
* सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर- 16021
* सट्टा कारोबार- 21009
* वायदा-ऑप्शन ट्रेडर (F&O)- 21010
* शेयर ट्रेडिंग- 21011 

रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240

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