सुभाष नगर ओवरब्रिज की घुमावदार डिजाइन पर आपत्ति, अब बदलेगा स्ट्रक्चर प्लान

भोपाल 

भोपाल के सुभाष नगर रेलवे ओवरब्रिज की 180 डिग्री घुमाव वाली डिजाइन बदलेगी। पीडब्ल्यूडी ब्रिज ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। मालाकार डिजाइन वाले थर्ड लेग पर काफी सवाल उठ रहे थे। इसमें मोती नगर बस्ती के 500 मकान भी बाधक बने हुए थे, जिनके लिए हाईकोर्ट ने स्टे दिया हुआ है। इन सभी दिक्कतों का हल थर्ड लेग री-डिजाइन से निकाला जाएगा। एक सप्ताह में नया प्रस्ताव नई डिजाइन के साथ उच्चाधिकारियों के सामने रखेंगे।

थर्ड लेग की डिजाइन पर भी सवाल उठे

मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा। थर्ड लेग का बजट अभी 22 करोड़ रुपए है। थर्ड लेग की लंबाई 242 मीटर है। इसे बनाने ठेका एजेंसी तय की हुई है। उसे नई डिजाइन देकर काम शुरू कराया जाएगा। भेल की ओर से ट्रैफिक जिंसी के रास्ते आगे निकालने थर्ड लेग तय की थी। सुभाष ब्रिज थर्ड लेग के लिए फरवरी- मार्च 2025 में काम शुरू करने की योजना बनी। इसके लिए मोती नगर मार्केट और आवासीय क्षेत्रों को नोटिस दिया। इससे ही विवाद बना। प्रशासन ने करीब 150 दुकानें तो तोड़ दी, लेकिन घरों के मामले में हाईकोर्ट का स्टे आ गया। इसे हटवाने प्रशासन कोई ठोस जवाब नहीं दे पाया। थर्ड लेग की डिजाइन पर भी सवाल उठे। अंतत: अब इस विवाद को खत्म करने की कोशिश हो रही है।

सुभाष नगर ब्रिज के आसपास बसी मोतीनगर बस्ती।

ब्रिज की थर्ड लेग मोती नगर से उठेगी ओर मौजूदा 80 फीट रोड क्रॉस कर खेल मैदान को पार कर मौजूदा ब्रिज से जुड़ेगी। इससे सवाल ये कि जब थर्ड लेग को 80 फीट रोड पार कर पार्क से ही मौजूदा आरओबी को कनेक्ट करना है तो इसके लिए मोती नगर बस्ती या दुकानों को हटाने की जरूरत क्यों? सीधे 80 फीट रोड पर पार्क की तरह सरकारी खाली जमीन से ब्रिज को लेकर कनेक्ट किया जा सकता था?
11 मील तिराहे पर फ्लाइओवर का भूमिपूजन आज

भोपाल-इंदौर 11 मील तिराहे पर सिक्सलेन फ्लाइओवर बनेगा। 31 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस ब्रिज के लिए बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, विधायक रामेश्वर शर्मा की उपस्थिति में भूमिपूजन होगा। सुबह 10 बजे होगा। खजूरी स्थित 11 मील तिराहा भोपाल बायपास व भोपाल इंदौर रोड का जंक्शन है। तेज रतार वाहनों की आपसी भिडंत की घटनाएं रोकने के लिए लाइओवर की मांग की जा रही थी। सिक्स लेन लाइओवर की लंबाई 850 मीटर होगी। यह 18 माह में बनेगा। एमपीआरडीसी को इसके निर्माण का जिमा दिया गया है। यहां सर्विस रोड बनेगी।

रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240

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