38 दिव्यांगजन को सक्षम के मंच से मिली मोटराइज्ड व्हील चेयर

आईआईटी चेन्नई के स्नातकों ने विकसित की नवीनतम तकनीक की व्हील चेयर

भोपाल 
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन रिसोर्स सेंटर में मंगलवार को आयोजित समारोह में 38 दिव्यांगजन हितग्राहियों को मोटराइज्ड व्हील चेयर का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम गैर सरकारी संगठन सक्षम द्वारा आयोजित किया गया जिसमें हितग्राहियों को अल्टीयस टेलीकॉम इंफ़्रा ट्रस्ट के सहयोग से व्हील चेयर वितरित की गई। कार्यक्रम प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय श्रीमती सोनाली वायंगणकर, आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया, सक्षम के राष्ट्रीय महासचिव उमेश अंधारे, संघ के प्रान्त सेवा प्रमुख विक्रम सिंह सहित सक्षम संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि श्रीमती वायंगणकर ने कहा कि समाज में दिव्यांगजन सरकार के अकेले दम पर सक्षमता अर्जित नहीं कर सकते हैं, यह तभी संभव है जब समाज की भागीदारी भी सरकार के साथ बराबरी से सुनिश्चित हो। उन्होंने अल्टीयस कम्पनी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिसने प्रदेश के 38 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड व्हील उपलब्ध कराई हैं।

आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया ने सीएसआर को भारत की प्राचीन परोपकार की परंपरा का अनुवर्तन बताते हुए सक्षम और कम्पनी के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सक्षम के महासचिव श्री उमेश अंधारे ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन रविन्द्र कोपरगांवकर ने किया।

एक लाख 10 हजार की व्हील चेयर

कार्यक्रम में वितरित की गई व्हील चेयर न्यू मोशन कम्पनी द्वारा विकसित की गई है। यह कम्पनी चेन्नई आईआईटी से निकले युवाओं ने तैयार की है जो नवीनतम तकनीकी से दिव्यांगजन के लिए व्हील चेयर बनाती है। इस व्हील चेयर का उपयोग हितग्राही वैकल्पिक रूप से अपने लिए स्थानीय रोजगार के साधन के रूप में भी कर सकते हैं। सक्षम के विश्वजीत सरमंडल ने बताया कि इस साल जनवरी में अल्टीयस कम्पनी के सहयोग से जिन 47 हितग्राहियों को व्हील चेयर वितरित की गई, वे स्व-रोजगार से जुड़ गए हैं। इस व्हील चेयर की कीमत एक लाख दस हजार है।

 

रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240

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