सीएम केयर योजना के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए औपचारिकताएँ प्राथमिकता से करें पूर्ण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता समय की मांग

भोपाल 
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंगलवार को मंत्रालय में सीएम केयर योजना अंतर्गत प्रस्तावित सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य अधोसंरचना के शीघ्र विस्तार के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को शीघ्र एवं प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नागरिकों को जटिल हृदय रोग, कैंसर एवं अन्य उच्च स्तरीय उपचारों के लिए अब बाहर जाने की आवश्यकता न रहे, इसके लिए योजना का प्राथमिकता से क्रियान्वयन आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि सुपर-स्पेशलिटी सीटों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रहा है। बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमडी/एमएस की 1909 सीटें, डीएम की 41 सीटें तथा एम.च. की 43 सीटें स्वीकृत हैं। उन्होंने कहा कि सुपर-स्पेशलिटी शिक्षा के विस्तार से प्रदेश में हृदय रोग, कैंसर, रेडियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, युरोलॉजी सहित अन्य जटिल बीमारियों के उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने आयुष्मान भारत के उपचार डेटा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, जनरल मेडिसिन, युरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और सीटीवीएस जैसी सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। आयुष्मान योजना में कैंसर के कीमोथेरेपी, डायलिसिस संबंधित, एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी, रेडियोथेरेपी, सीटी-एमआरआई-पीईटी स्कैन, सीटीवीएस-लैप्रोस्कोपी आदि तृतीयक सेवाओं की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। ऐसी स्थिति में भविष्य की मांग अनुसार शीघ्र तैयारी पूर्ण कर स्वास्थ्य अधोसंरचनाओं का विकास करना होगा।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सुपर-स्पेशलिटी विभागों के उन्नयन, आवश्यक मानवबल, उपकरणों, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण तथा संबंधित अनुमतियों की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूर्ण किया जाए, जिससे सीएम केयर योजना का लाभ शीघ्र आमजन तक पहुँच सके। सीएम केयर योजना का उद्देश्य प्रदेश में कार्डियक और ऑन्कोलॉजी उपचार को उच्च गुणवत्ता के साथ सुलभ बनाना है। इसके अंतर्गत ऑन्कोलॉजी/ऑन्को-सर्जरी, कार्डियोलॉजी और सीटीवीएस में अधिक सुपर-स्पेशलिस्ट तैयार करना, कार्डियक एवं कैंसर उपचार के तृतीयक ढांचे को मजबूत करना, उन्नत उपचार पर होने वाले जेब खर्च को घटाना, कार्डियोलॉजी एवं ऑन्कोलॉजी में उत्कृष्टता संस्थान विकसित करना, राज्य में रोबोटिक सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट कार्यक्रम सुदृढ़ीकरण शामिल है। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री तरुण राठी, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240

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