दुख को ताकत बनाया: पिता को मुखाग्नि देकर क्रिकेट की जिम्मेदारी निभाने लौटे रिंकू सिंह
अलीगढ़
पिता को मुखाग्नि देने के बाद रिंकू सिंह अपने कर्तव्य पथ पर लौट गए। शनिवार को वह कोलकाता में टीम से जुड़ गए। पिता के निधन से दुखी रिंकू सिंह ने कहा कि पापा के लिए रन बनाऊंगा। भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद का शुक्रवार को नोएडा के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
उन्होंने मां बीना देवी और छोटी बहन नेहा सिंह को संभालते हुए कहा कि हिम्मत बनाए रखें। बड़े भाई सोनू सिंह को जिम्मेदारी सौंपते हुए रिंकू ने कहा कि अब घर की बागडोर उन्हें संभालनी है और मां का विशेष ध्यान रखना है।
पारिवारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने के बाद रिंकू सिंह शनिवार सुबह 11:30 बजे ओजोन सिटी अलीगढ़ से रवाना हुए और कोलकाता पहुंचकर भारतीय टीम के साथ दोबारा जुड़ गए। विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय दायित्व को रखने की उनकी भावना की क्रिकेट जगत में सराहना हो रही है।
इधर, ओजोन सिटी में दूसरे दिन रिंकू के परिवार को सांत्वना देने पहुंचने वाले लोगों का तांता लगा रहा। सपा सांसद प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज, हाथरस सांसद अनूप प्रधान, विधायक अनिल पारासर, विधायक रविंद्र पाल सिंह, एमएलसी ऋषिपाल सिंह, आगरा के सपा नेता रामजी लाल सुमन, सुमित सराफ, संजय माहेश्वरी, विनीत मोटर्स आदि ने परिवार को ढांढस बंधाया।
लीवर कैंसर के स्टेज-4 से थे पीड़ित, दी जा रही थी रिप्लेसमेंट थेरेपी
रिंकू सिंह के पिता खानचंद को मंगलवार को नोएडा के यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा रही थी। खानचंद लीवर कैंसर के स्टेज-4 से पीड़ित थे। रिंकू के भाई सोनू अस्पताल में मौजूद रहे और पिता की देखरेख करते रहे। पिता की तबीयत बिगड़ने पर मंगलवार को रिंकू भी उनसे मिलने आए थे।
जानकारी के अनुसार, शुरुआत में पिता बेटे के क्रिकेट के खेलने के खिलाफ थे लेकिन एक बार रिंकू को मैच में इनाम के तौर पर बाइक मिली थी। उसके बाद आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने रिंकू को क्रिकेटर बनने के लिए हर संभव सहयोग किया है। बीते वर्ष रिंकू ने अपने पिता को 3.19 लाख रुपये की कावासाकी निंजा बाइक उपहार में दी थी।
