आर्मी चीफ ने कहा- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में नमाज के वक्त हमला नहीं किया गया, सबका मालिक एक

नई दिल्ली

पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों के मासूम पर्यटकों पर किए गए हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर सीमा पार पल रहे आतंकियों के ठिकाने नेस्तनाबूद कर दिए। 'ऑपरेसन सिंदूर' को लेकर आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक इंटरव्यू में कई ऐसी बातें बताई जिससे भारतीय सेना की बहादुरी के साथ ही उसकी इंसानियत भी नजर आती है। जनरल द्विवेदी ने कहा, 'जब भी हमें अपने टारगेट पर हमला होता था तो यह समय कुछ भी हो सकता था लेकिन इतना ध्यान जरूर रखा जाता था कि यह नमाज का वक्त ना हो। अगर आतंकी कैंप में भी लोग नमाज पढ़ रहे हों तो हमला ना किया जाए। क्योंकि सबका मालिक एक है।'

आर्मी चीफ ने आगे कहा, भारतीय सेना को अगर पता चलता था कि नमाज हो रही है तो हमले का समय बदल दिया जाता था। उन्होंने कहा कि भले ही स्थिति युद्द वाली रही हो लेकिन भारतीय सेना ने संयम बरता और दुश्मनों की भी इबादत का सम्मान किया।

बदल गया है युद्ध
इससे पहले रण संवाद मंच को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर, विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की दिशा में भारत की प्रगति का सबसे शक्तिशाली साधन था। लेकिन हमें विभिन्न क्षेत्रों का एकीकरण और तालमेल का लक्ष्य प्राप्त करना होगा।’ सेना प्रमुख ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद गठित युद्ध सूचना संगठन और मनोवैज्ञानिक रक्षा प्रभाग के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ''हमारे प्रयासों का 15 प्रतिशत हिस्सा दुष्प्रचार अभियान से निपटने पर केंद्रित था।'

हालांकि, उन्होंने चेताया कि प्रमुख चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, विशेष रूप से रणनीतिक, परिचालन और सामरिक स्तरों पर संचालन में समन्वय स्थापित करने और 'हाइब्रिड या ग्रे-ज़ोन' युद्ध के बढ़ते प्रचलन से निपटने में। उन्होंने कहा, 'ये आमतौर पर पारंपरिक सैन्य सीमा से नीचे होते हैं, जिनका उद्देश्य दुश्मन की कमजोरियों का फायदा उठाना होता है।'

थलसेना प्रमुख ने कहा कि एमडीओ की उनकी कल्पना ऐसी नहीं है जिसमें सेना के छह अलग अलग क्षेत्र अलग-अलग समानांतर काम करें, बल्कि सभी ''बदलते हालात के हिसाब से लगातार आपसी तालमेल में हों, जहां परिस्थिति के अनुसार महत्व बदलता रहे और नेतृत्व भी बदलता रहे।''

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल भौगोलिक सीमाओं या किसी एक सेना की प्रधानता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विभिन्न क्षेत्र, हितधारकों और संघर्ष के अलग-अलग स्तर के बीच लगातार होने वाले आपसी समन्वय से परिभाषित होता है। युद्धक्षेत्र में हो रहे बदलावों पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि एमडीओ के कारण युद्ध का स्वरूप ऐसा हो गया है, जहां अलग-अलग स्तर और दिशाओं में एक साथ ऑपरेशन चलते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कमांडरों को सामरिक से लेकर रणनीतिक स्तर तक, विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी विकसित करनी चाहिए।

एकीकरण के परिचालन महत्व को रेखांकित करते हुए, जनरल द्विवेदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बताया जनरल द्विवेदी ने कहा, ''यह जमीनी खुफिया नेटवर्क, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) से मिली जानकारियों का मेल था जिसने थल सेना और वायु सेना की संयुक्त कार्रवाई को लक्ष्य निर्धारित करने में मदद की, वहीं नौसेना की तैनाती में बदलाव ने रणनीतिक आकलन को आकार दिया। किसी एक क्षेत्र ने इस अभियान का फैसला नहीं किया।''जनरल द्विवेदी ने एकीकृत युद्ध समूहों, रुद्र ब्रिगेड, ड्रोन इकाइयों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध संरचनाओं और साइबर ऑपरेशन नोड्स के संचालन सहित कई संरचनात्मक सुधारों का भी जिक्र किया।