ग्वालियर कोर्ट सख्त: तत्कालीन SP सहित 4 पुलिसकर्मियों पर डकैती केस, 22 जून को पेश होने के आदेश
ग्वालियर
ग्वालियर के विशेष सत्र न्यायालय ने दो साल पुराने मामले में भोपाल के DIG राजेश सिंह चंदेल (तत्कालीन ग्वालियर एसपी) समेत तत्कालीन टीआई, एसआई और हवलदार पर डकैती का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं. परिवाद मामले की सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने ये आदेश दिया. पीड़ित ने पुलिस के खिलाफ याचिका लगाई थी।
धोखाधड़ी केस में 30 लाख वसूलने का आरोप
मामले के अनुसार ग्वालियर के थाटीपुरा थाना पुलिस ने दिसंबर 2024 में ग्वालियर के विक्रम राणा समेत दो लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था. इसी मामले में समझौते के नाम पर 30 लाख रुपये वसूलने का आरोप विक्रम के भाई अनूप राणा ने परिवाद में लगाया था. सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने आईपीसी राजेश चंदेल सहित 03 पुलिसकर्मियों पर डकैती, साजिश रचने और सबूत मिटाने का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
शिकायत की तो उल्टा जेल भेज दिया
शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, अनूप राणा के भाई पर थाटीपुर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज था, जिसमें फरियादी से समझौता हो चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने पहले 5 लाख रुपए लिए और बाद में और पैसों की मांग करने लगी।
कोर्ट में दी गई दलील के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह के इशारे पर हवलदार संतोष वर्मा ने अनूप राणा के घर से 9.50 लाख रुपए और मामले से जुड़ी एक महिला आरोपी के घर से 15 लाख रुपए लिए।
एसपी से की थी लिखित शिकायत
अनूप राणा ने जब तत्कालीन SP राजेश चंदेल से इसकी लिखित शिकायत की, तो कार्रवाई करने के बजाय मामला दोबारा थाटीपुर थाने भेज दिया गया। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने अनूप राणा को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने साल 2024 में अदालत का दरवाजा खटखटाया।
CCTV फुटेज डिलीट होने पर कोर्ट सख्त सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाटीपुर थाने के CCTV फुटेज मांगे थे। इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि 3 जनवरी 2024 से पहले के फुटेज डिलीट हो चुके हैं। कोर्ट ने इस जवाब पर सख्त नाराजगी जताई।
मामले में रेडियो पुलिस अधीक्षक की जांच का भी जिक्र सामने आया, जिसमें थाने के स्टाफ को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे। अदालत ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया।
नौकरी के नाम पर ठगी केस से शुरू हुआ विवाद
पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच से जुड़ा है और अनूप राणा व उसका भाई उसी रैकेट का हिस्सा थे। वहीं, अनूप राणा का कहना है कि वह खुद ठगी का शिकार हुआ था और अपने भाई की मदद के लिए थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने उसे ही आरोपी बना दिया। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को बचाते हुए उससे और उसके भाई से लाखों रुपए वसूले।
आखिर क्या है पूरा मामला ?
फरियादी के वकील अशोक प्रजापति के मुताबिक "फ़रवरी 2024 में इन पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ लगाये गए परिवाद में बताया गया है विक्रम राणा और चन्द्रलेखा जैन के ख़िलाफ़ दिसंबर 2023 में धोखाधड़ी का मामला थाटीपुर थाने में दर्ज किया गया था. थाटीपुर पुलिस ने उस केस के फ़रियादी से समझौता कराने के नाम पर 5 लाख 80 हज़ार रुपये लिए. इसके बाद 24 दिसंबर 2023 को दोनों आरोपियों विक्रम और चंद्रलेखा को थाने बुलाया, जहां 25 लाख रुपये की और डिमांड की गई. इस पर दोनों आरोपियों विक्रम से 9 लाख 75 हज़ार और चंद्रलेखा के घर से 15 लाख रुपये (कुल 24 लाख 75 हज़ार रुपये) मंगवा कर रख लिये गए. पुलिस द्वारा 30 लाख रुपये और देने का दबाव बनाया गया. जब फिर से और रुपये मांगे गए तो फरियादियों ने रुपये देने से इंकार कर दिया।
एसपी पर आरोप- शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की
परिवाद में दावा किया गया कि जब पुलिस को और रुपये नहीं मिले तो उन्होंने फरियादी को षड्यंत्रकारी बनाकर जेल भिजवा दिया गया. परेशान होकर मामले की शिकायत विक्रम के भाई अनूप राणा ने तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल से भी की लेकिन उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की. इन हालतों से परेशान हो कर फ़रियादी ने न्यायालय में पुलिस के ख़िलाफ़ ही याचिका दायर की. न्यायालय ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने के आदेश दिए।
साक्ष्य मिटाने और साजिश के आरोप
फरियादी के अधिवक्ता अशोक प्रजापति के मुताबिक "न्यायालय ने पुलिस से थाटीपुर थाने में लगे सीसीटीवी के फुटेज बतौर साक्ष्य मांगे लेकिन पुलिस ने हलफनामा दिया, जिसमें लिखा था कि 3 जनवरी 2024 से पहले के सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो चुके हैं. पुलिस पर लापरवाही और ऐसे जवाब पर नाराजगी जताते हुए विशेष सत्र न्यायालय ने सभी तथ्यों को संज्ञान में लिया और सोमवार को इस परिवाद में तत्कालीन एसपी आईपीएस राजेश चंदेल, तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ, उपनिनिरीक्षक अजय सिंह सिंह सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ लूट, डकैती, साक्ष्य मिटाने और साजिश रचने का केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
