अयोध्या के VIP इलाके में बन रहा लवकुश का घर, ₹12 हजार सैलरी के बीच सामने आईं निर्माण की तस्वीरें

 अयोध्या 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों को लेकर अब नए खुलासे हो रहे हैं. आजतक की टीम मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा द्वारा खरीदी गई एक ऐसी ही प्रॉपर्टी तक पहुंची. यह मकान अयोध्या-लखनऊ हाईवे के किनारे स्थित बनबीरपुर गांव में बन रहा है और स्थानीय लोगों का दावा है कि यह घर लवकुश मिश्रा का ही है। 

आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक, लवकुश मिश्रा ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर यह जमीन खरीदी थी. दस्तावेजों के मुताबिक, यह जमीन सोहावल तहसील के मंगसी परगना इलाके में कमल स्वरूप सिंह से 8 लाख 80 हजार रुपये में खरीदी गई थी. वर्तमान में इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है. आजतक को इस जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज के दस्तावेज भी मिले हैं। 

दस्तावेजों के मुताबिक, जमीन का दाखिल-खारिज 6 मार्च 2026 को सुप्रिया मिश्रा, निवासी मीनापुर भगोली, तहसील रुदौली, जिला अयोध्या के नाम पर किया गया. पड़ोस में रहने वाले राजकुमार पांडे ने लवकुश मिश्रा की तस्वीर देखकर पहचान की और कहा कि यही व्यक्ति इस निर्माणाधीन मकान का मालिक है. उन्होंने बताया कि फरवरी महीने से यहां मकान का निर्माण कार्य चल रहा था और दो दिन पहले तक मजदूर काम कर रहे थे. हालांकि, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से परिवार दिखाई नहीं दे रहा है और रविवार से यहां काम भी बंद हो गया है। 

अयोध्या के वकील नहीं करेंगे आरोपियों की पैरवी
इस  बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा फैसला लेते हुए आरोपियों की पैरवी नहीं करने का ऐलान किया है. बार एसोसिएशन की सोमवार को हुई सामान्य सभा की बैठक में यह निर्णय लिया गया. बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि कोई वकील आरोपियों की ओर से केस लड़ता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। 

बैठक के दौरान वकीलों ने यह भी मांग की कि मामले से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ देना चाहिए. वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो शहर की नाकेबंदी की जाएगी. चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव थे और अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य थे. दोनों ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है। 

फैजाबाद बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा, 'मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हमारी भावनाएं आहत हुई हैं. फैजाबाद के सभी वकीलों ने गिरफ्तार आरोपियों का बचाव नहीं करने पर सहमति जताई है.' इस फैसले के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा का एक वीडियो भी वायरल हुआ. वीडियो में वह कहते सुनाई दे रहे हैं, 'कोई भी वकील इस मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा. अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. हम मामले की सीबीआई जांच की भी मांग करते हैं। 

यह घटनाक्रम अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की निगरानी में चल रही जांच के बीच सामने आया है. अब तक इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिन्हें सोमवार को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं चंपत राय का बयान भी दर्ज किया गया है. इस मामले में जिन 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, उनमें- रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, रामा शंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव शामिल हैं। 

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोप क्या हैं?
राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप इस महीने तब सामने आए जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि 7 से 7.5 करोड़ रुपये के चढ़ावे का गबन हुआ है. इसके बाद विपक्ष के कई नेताओं ने इससे भी बड़े दावे किए. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या दौरे के दौरान कहा था कि भगवान राम को चढ़ाए गए हीरे-जवाहरात तक चोरी हो गए. उन्होंने आरोप लगाया, 'भक्तों द्वारा चढ़ाए गए हीरे और कीमती पत्थर चोरी हो गए, 200 करोड़ रुपये नकद चोरी हो गए और 200 किलो चांदी भी गायब हो गई.' इसी तरह अन्य विपक्षी नेताओं ने भी 70 किलो चांदी, 1250 किलो सोना और 200 करोड़ रुपये नकद चोरी होने के आरोप लगाए और सरकार से जवाबदेही की मांग की। 

हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट ने एक प्रेस रिलीज जारी करके इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे के रूप में दिए गए सोने चांदी के आभूषण और अन्य जेवरात पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका पूरा हिसाब मौजूद है. ट्रस्ट ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सामने आई घटनाओं से वह 'स्तब्ध, आहत और बेहद दुखी' है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इन आरोपों की जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद की जाएगी।