सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, शॉर्टकट से अमीर बनने वालों को बेऊर जेल की चेतावनी
पटना.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि बिहार में शॉर्टकट से अमीर बनने वालों के लिए बेऊर जेल में जगह तय है। जो भी गलत तरीके से संपत्ति अर्जित करेगा या भ्रष्टाचार करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि नेता, मंत्री, विधायक या अधिकारी, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। वे गुरुवार को बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्य में पहली बार बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह का शुभारंभ किया। यह अभियान पूरे राज्य में एक सप्ताह तक चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के करीब 80 वर्ष बाद पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ जन-जन तक जागरूकता पहुंचाने का व्यापक अभियान शुरू किया गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए बिहार सरकार भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान चला रही है।
ट्रिपल-टी बनेगा सुशासन का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रस्ट (Tripple-T) के सिद्धांत पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आएगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने सतर्कता विभाग के कार्यों की सराहना की। कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने की आवश्यकता है।
राज्य की एजेंसियों को होना होगा और प्रभावी
उन्होंने कहा कि बिहार में विजिलेंस, स्पेशल यूनिट और आर्थिक अपराध इकाई जैसी सक्षम एजेंसियां हैं। इन एजेंसियों को इतना प्रभावी बनना होगा कि बाहरी एजेंसियों के हस्तक्षेप की जरूरत ही न पड़े। जहां भी भ्रष्टाचार की शिकायत मिले, वहां बिना किसी दबाव के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
30 दिन में होगा शिकायतों का निपटारा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही तय की गई है। किसी भी शिकायत के निपटारे के लिए 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है। यदि कोई अधिकारी गलत आदेश देता है तो उसकी शिकायत उनके वरिष्ठ से की जा सकती है, हरहाल में तय अवधि में उसका निष्पादन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ब्लॉक कार्यालयों और थानों में भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। संबंधित वरीय अधिकारियों को इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर न्याय मिल सके।
