Vidisha News: उदयगिरी गुफाओं में महिषासुरमर्दिनी का अद्भुत स्वरूप, 1700 साल पुरानी प्रतिमा से जुड़ा है गौरवशाली इतिहास

भोपाल.

भोपाल से करीब 60-65 किमी दूर विदिशा जिले की ऐतिहासिक उदयगिरी गुफाओं में शक्ति पूजा के सबसे पुराने पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद हैं।

यहां महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा यानी "महिषासुरमर्दिनी" की ऐसी प्रतिमा है, जिसके 12 हाथ हैं। गुप्तकाल के दौरान चौथी-पांचवी शताब्दी में बनी यह प्रतिमा मध्य भारत में मिली देवी की सबसे प्राचीन प्रतिमा है।

उकेरा गया देवी का स्पष्ट स्वरूप
देश के चुनिंदा हिस्सों से जो प्रतिमाएं इससे पहले मिली हैं, उनमें देवी का यह स्वरूप इतना स्पष्ट नहीं है। उदयगिरी में गुफा की उत्तरी दीवार पर बनी इस प्रतिमा में उन्होंने महिषासुर की गर्दन दबोच रखी है। दाहिना पैर राक्षस की पीठ पर है और बायां पैर एक आधार पर टिका है, जिसे कुछ लोग उनके वाहन शेर के तौर पर पहचानते हैं।

1700 साल प्राचीन होने का दावा
दाहिनी ओर के एक हाथ में त्रिशूल है, जिससे उन्होंने राक्षस को बींध रखा है। दूसरे हाथों में तलवार, ढाल, धनुश-बाण, गदा, पानपात्र, खप्पर जैसे अस्त्र-शस्त्र दिखाए गए हैं। करीब 1700 साल पहले उकेरी गई यह प्रतिमा इस क्षेत्र में शक्ति पूजा की सबसे समृद्ध परंपरा की पुष्टि है।

गुफाओं का गुप्त काल में निर्माण –
मंदिर रूपी गुफाओं का निर्माण गुप्त काल में चौथी शताब्दी के उत्तरार्द्ध और पांचवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में मालवा विजय के उपलक्ष्य में हुआ था। यहां बनी महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा मध्य भारत में मिली सबसे प्राचीन देवी प्रतिमा है। देश में भी ऐसी गिनी-चुनी प्रतिमाएं ही हैं। दूसरी प्रतिमाओं में देवी के आठ, 10 या कहीं कहीं 20 हाथ दिखाए गए हैं, लेकिन यहां देवी के 12 हाथ हैं।
– डॉ. नारायण व्यास, पुरातत्वविद्