BJP एमएलसी संजय पासवान बोले, हम अकेले चुनाव जीतने में सक्षम

पटना  
 भाजपा के विधान पार्षद डा. संजय पासवान ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद पर भाजपा की दावेदारी ठोक दी है। उन्होंने कहा है कि जनता अब भाजपा के किसी पिछड़े वर्ग के नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। जनता एक ही चेहरे से अब ऊब चुकी है। नाराजगी ऐसी है कि अगर मजबूरी हो तो दल बदलने के जगह उसी दल के किसी दूसरे चेहरे पर लोग मान सकते हैं। लेकिन सही मायने में वह भाजपा के किसी नेता को इस पद के लिए अब सही माने हैं। 

डा. पासवान ने कहा कि अब तक वह राज्य के लगभग 22 जिलों में भ्रमण कर चुके हैं। वहां की जनता से जो भी राय मिली उसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ना सिर्फ मैं बल्कि पार्टी के अधिसंख्य नेताओं को भी यह फीडबैक मिल रहा है और उन्होंने भी नेतृत्व को इससे अवगत कराया है। जनता से जिस तरह से फीडबैक मिल रहे हैं उससे भाजपा की ओर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी या केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को मुख्यमंत्री के रूप में सामने का चुनाव लड़ा जा सकता है। इसके अलावा उप मुख्यमंत्री का पद किसी सवर्ण या दलित या फिर दोनों को दिया जा सकता है। 

उन्होंने कहा है कि अंतिम फैसला तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को ही करना है। वही फैसला सबके लिए मान्य भी होगा। लेकिन मैने अपना काम कर दिया है। जनता की राय से नेतृत्व को अवगत करा दिया है।  

आपको बता दें कि बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर करीब सभी प्रमुख दलों ने अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह पार्टी संगठन में जोश भरने के साथ नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जैसे मसलों पर विरोधियों को जवाब देने के लिए 16 जनवरी को बिहार पहुंचेंगे। माना जाता है कि शाह इस एक दिवसीय दौरे में कई निशाने साधेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले शाह के प्रदेश आगमन को लेकर जहां पाटीर् नेताओं और कार्यकतार्ओं में नया जोश और स्फूर्ति आने की उम्मीद है, वहीं शाह अपने सहयोगी दलों को भी दोस्ती का पाठ पढ़ाने की कोशिश करेंगे। 

लोकसभा चुनाव में मिली सफलता और पड़ोसी राज्य झारखंड में सत्ता खो देने के बाद शाह के इस समय बिहार दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि खरमास यानी 15 जनवरी के बाद भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी तैयार होनी है, ऐसे में कहा जा रहा है कि शाह इस पर भी अपनी मुहर लगाएंगे। मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सीएए को मुद्दा बनाकर लोगों के बीच पहुंच रही है, उसकामुकाबला करने के लिए भाजपा पूरी तरह पार्टी प्रमुख के दौरे की राह देख रही है। वैसे, भाजपा ने सदन से लेकर सड़क तक विरोधियों को जवाब देने की राणनीति तय की है। केंद्र के निर्देश पर जागरूकता अभियान शुरू किया गया है, लेकिन पार्टी नेताओं में उत्सुकता बनी हुई है कि शाह 16 जनवरी को वैशाली की जनसभा में क्या बोलते हैं। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में जब जद (यू) अकेले चुनाव लड़ी थी, तब उसे मात्र दो सीटें हाथ लगी थीं, लेकिन वर्ष 2019 में भाजपा के साथ आ जाने के बाद जद (यू) ने 16 सीटों पर सफलता पाई। इस चुनाव में भाजपा, जद (यू) और लोजपा के गठबंधन को 53.22 प्रतिशत मत मिले थे और अकेले जद (यू) को 21.7 प्रतिशत मत हासिल हुए थे। बहरहाल, कहा जा रहा है कि शाह वैशाली की रैली में सीएए को लेकर लोगों में फैली भ्रांतियां दूर करेंगे, मगर सच यह भी है कि शाह अपनी एक दिवसीय बिहार यात्रा के दौरान और भी कई निशाने साधेंगे।