भोपाल मेट्रो के संचालन की दिशा में बड़ा कदम, 200 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर हुआ ऊर्जीकृत

भोपाल .

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि भोपाल मेट्रो के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा 220 केवी सबस्टेशन गोविंदपुरा, भोपाल में 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया है।

इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से भोपाल मेट्रो के सुभाषनगर सबस्टेशन के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी।

सीमित जगह में स्थापित किया ट्रांसफार्मर

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि मेट्रो परियोजना के लिए यह स्थापना एमपी ट्रांसको के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही। शहर के मध्य स्थित गोविंदपुरा सब स्टेशन में सीमित उपलब्ध स्थान के कारण बड़े क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर की स्थापना एक जटिल कार्य था। एमपी ट्रांसको मुख्यालय, जबलपुर स्थित प्लानिंग एवं डिजाइन विभाग के इंजीनियरों ने अपने कौशल, नवाचार और तकनीकी दक्षता से सब स्टेशन परिसर में आवश्यक स्थान चिन्हित कर यह कार्य संभव बनाया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने लिए ऊर्जा मंत्री  तोमर ने ट्रांसमिशन कंपनी के कार्मिकों को बधाई दी है।

सब स्टेशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि

एमपी ट्रांसको भोपाल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  राजेश शांडिल्य ने जानकारी दी कि भोपाल मेट्रो के डिपॉजिट वर्क के तहत इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से 220 केवी सबस्टेशन, गोविंदपुरा (भोपाल) की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में वृद्धि हुई है। यह इस सब स्टेशन का पाचंवा 220 केवी वोल्टेज लेवल का ट्रांसफार्मर है। अब सब स्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 820 एमवीए हो गई है, जिससे भोपाल शहर और मेट्रो परियोजना की भविष्य की विद्युत आवश्यकताओं को सुदृढ़ता मिले

रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240

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