क्या फिर दौड़ेगी F1 कारें? बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर अडानी ग्रुप की नजर
नई दिल्ली
Indian Grand Prix- Formula One: भारत को मोटरस्पोर्ट की ग्लोबल पहचान दिलाने वाला बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) एक बार फिर चर्चा में है. वजह है अडानी ग्रुप की दिलचस्पी और भारत में फॉर्मूला 1 रेस की संभावित वापसी. दुनिया के सबसे बेहतरीन फार्मूला वन रेस ट्रैक्स में से एक बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट को लेकर अडानी ग्रुप नई रणनीति पर काम कर रहा है. यह जानकारी अडानी ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी करण अडानी ने दी है. उन्होंने साफ कहा है कि भारत में F1 को दोबारा लाने को लेकर वे व्यक्तिगत रूप से काफी उत्साहित और एक्टिव हैं.
अडानी ग्रुप इस समय बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का अधिग्रहण करने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय खेल मंत्री मंसुख मांडविया ने हाल ही में सर्किट का दौरा किया और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से बातचीत की. इससे सरकार की दिलचस्पी भी साफ नजर आती है.
वहीं देश की राजधानी में आयोजित ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 70वें स्थापना दिवस समारोह में करण अडानी ने कहा कि बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट इस पूरे सौदे का अहम हिस्सा है. उन्होंने कहा कि भारत में फॉर्मूला 1 के चाहने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है और देश में इस खेल की जबरदस्त संभावनाएं हैं.
बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) का मालिकाना हक जेपी ग्रुप के पास है. दुनिया भर में फॉर्मूला वन रेस के जरिए भारत को ग्लोबल पहचान दिलाने वाले इस सर्किट को विशेष रूप से जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड ने बनाया था. यह सर्किट भारत में फॉर्मूला 1 रेस की मेजबानी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा. हालांकि, समय के साथ जेपी ग्रुप फाइनेंशियल क्राइसिस में फंस गया. बकाया पेमेंट न हो पाने के कारण साल 2019 के आसपास इस जमीन को यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने अपने अधीन ले लिया.
अब इस पूरे मामले में अडानी ग्रुप एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरा है. अडानी ग्रुप, जेपी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी, मुश्किल में फंसी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) को खरीदने की दौड़ में है. नवंबर 2025 में, अडानी ग्रुप ने कर्ज़ में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स को खरीदने के लिए ज़्यादातर लेंडर्स का वोट जीता, क्योंकि उसके 14,535 करोड़ रुपये के एक्विजिशन प्रपोज़ल में दूसरे बिडर्स की तुलना में ज़्यादा अपफ्रंट पेमेंट शामिल था. जिसके चलते अडानी ग्रुप को अधिकांश कर्जदाताओं का सपोर्ट मिला. माना जा रहा है कि इस डील से बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट से जुड़ी तस्वीर भी आने वाले समय में बदल सकती है.
करण अडानी का कहना है कि "वे साल 2000 से इस खेल को करीब से देख रहे हैं और उनका मानना है कि भारत फॉर्मूला 1 जैसे ग्लोबल स्पोर्ट इवेंट्स के लिए एक नया स्टैंडर्ड बना सकता है. उन्होंने कहा कि, यह केवल 3 दिन की रेस नहीं है बल्कि भारत को एक ग्लोबल पहचान देने वाला स्पोर्ट है. भारत न केवल इसे सफलतापूर्वक आयोजित करत सकता है बल्कि बाकि दुनिया के लिए एक उदाहरण भी बन सकता है."
जब मायावती ने दी ट्रॉफी
बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट ने 2011 से 2013 तक फॉर्मूला 1 इंडियन ग्रां प्री की मेजबानी की थी. उस समय ट्रैक और फीचर्स की दुनिया भर में तारीफ हुई थी. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार की टैक्स पॉलिसी के कारण F1 को मनोरंजन की श्रेणी में रखा गया, जिसके बाद यह रेस बंद हो गई. साल 2011 में जब भारत में पहली फॉर्मूला वन रेस हुई थी उस वक्त प्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी (BSP) की सरकार थी. उस वक्त मुख्यमंत्री मायावती ने पहले इंडिन ग्रां प्री (India Grand Prix) के विजेता रेडबुल टीम के रेसर सेबेस्टियन वेट्टेल (Sebastian Vettel) को जीत ट्रॉफी सौंपी थी. सेबेस्टियन ने रेड बुल रेसिंग के लिए सभी तीनों एडिशन को जीता था.
रेसिंग की दुनिया ने 2023 में फिर से बुद्ध सर्किट पर कदम रखा, जब MotoGP ने भारत में डेब्यू किया. हालांकि 3 साल के एग्रीमेंट के बावजूद मोटोजीपी अभी दोबारा भारत नहीं लौट सका है. ऐसे में F1 को भारत में वापस लाना आसान नहीं होगा. मौजूदा समय में एक रेस की मेजबानी फीस 70 से 150 मिलियन डॉलर तक बताई जाती है. दुनिया भर के कई सर्किट पहले से ही फार्मूला वन कैलेंडर में जगह बनोन के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं.
दिसंबर 2025 में फार्मूला वन की तरफ से एक बयान जारी किया गया था. जिसमें बताया गया कि, भारत में फार्मूला वन के तकरीबन 7.9 करोड़ से ज्यादा फैंस हैं. खैर अभी इस बारे में कुछ भी कह पाना थोड़ा मुश्किल है, भारत में F1 की वापसी हो पाएगी या नहीं. अगर अडानी ग्रुप का अधिग्रहण पूरा होता है और सरकार का मजबूत सहयोग मिलता है, तो आने वाले वर्षों में भारत में फिर से एफ1 की रफ्तार देखने को मिल सकती है.
