सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्णय, अधिक टोल वसूली पर होंगे टोल शुल्क निरस्त
गुना
सुप्रीम कोर्ट ने लेबड़-जावरा, जावरा-नयागांव टोल रोड पर लागत से कई गुना वसूली संबंधी याचिका को इंदौर हाईकोर्ट के खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया। फिर सुनवाई कर 3 माह में निर्णय करने का आदेश दिया। सभी पक्षों को 18 मार्च को हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। सीजेआइ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या की खंडपीठ ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर ये निर्देश दिए।
याचिकाकर्ता ने देवास-भोपाल टोल रोड को भी शामिल करने व जनवरी 2026 तक के टोल संग्रहण, दुर्घटना के आंकड़े, अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने की अनुमति का अनुरोध किया। नोएडा ब्रिज पर टोल वसूली रद्द करने के 20 दिसंबर 2024 के आदेश व मंदसौर ब्रिज पर टोल वसूली पर आदेश के प्रकाश में याचिका पर आदेश देने का अनुरोध किया गया।
देवास-भोपाल रोड की लागत 345 करोड़, टोल वसूली 2056 करोड़
सकलेचा ने याचिका में कहा, स जनवरी 2026 तक जावरा नयागांव टोल रोड पर लागत 426 करोड़ के स्थान पर 2635 करोड़, लेबड़-जावरा पर 589 करोड़ के स्थान पर 2376 करोड़, देवास-भोपाल टोल पर 345 करोड के स्थान पर 2056 करोड़ टोल वसूला गया है। कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर ने रखरखाव खर्च और ब्याज को फिजिकल रिपोर्ट में खर्च से कई गुना बढ़ाकर बताया। तीनों रोड पर जनवरी 2026 तक 10691 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 8.314 घायल व 3821 लोगों की मौत हुई। वास्तविक वसूली के अनुसार 2016-17 तक तीनों कंपनियों को लागत रखरखाव ब्याज के बाद 140 करोड़ से 320 करोड़ तक लाभ हो रहा है। फिर भी लेबड़-जावरा रोड पर दिसंबर 2038 तक व जावरा-नयागांव, देवास-भोपाल रोड पर दिसंबर 2033 तक टोल और वसूला जाएगा।
टोल रोड के निवेशकों को बनाएं पार्टी
शीर्ष कोर्ट ने आदेश दिया, सकलेचा द्वारा इंदौर हाईकोर्ट में अप्रेल 2022 में दाखिल याचिका को फिर सुनकर 3 माह में निर्णय दें। याची से कहा कि वह हाईकोर्ट में 15 दिन में नया आवेदन दाखिल करें। टोल रोड के निवेशकों व जिनके हित प्रभावित हो रहे. उन्हें पार्टी बनाएं। सकलेचा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा आदि तो शासन से एजी प्रशांत सिंह व अन्य पेश हुए।
