दुबई में मंदी, भारत में चांदी: गुरुग्राम और मुंबई प्रॉपर्टी निवेश के लिए प्रमुख हॉटस्पॉट

 गुरुग्राम / मुंबई

ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण दुबई के प्रॉपर्टी बाजार की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, जिससे अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इसका फायदा भारतीय लग्जरी रियल एस्टेट को मिल सकता है. दुबई लैंड डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत से संपत्ति की बिक्री में साल-दर-साल 44 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है. यह मंदी घरों, विला, ऑफिस और कमर्शियल मार्केट, सभी क्षेत्रों में देखी जा रही है। 

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक आमतौर पर घरेलू बाजारों को प्राथमिकता देते हैं, जो तुलनात्मक रूप से स्थिर होते हैं. भारत का आवासीय क्षेत्र, जिसे मजबूत मांग और आर्थिक विकास का समर्थन प्राप्त है, उन निवेशकों से लाभ उठा सकता है जो फिलहाल विदेशी निवेश को टाल रहे हैं या उस पर पुनर्विचार कर रहे हैं। 

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों (यूएई सहित) पर जवाबी हमले किए. इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष और गहरा गया है। 

दुबई में आई इस सुस्ती से भारत के लिए अल्पकालिक अवसर पैदा हो सकते हैं. विशेष रूप से गुरुग्राम, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के लग्जरी हाउसिंग मार्केट में तेजी देखने को मिल सकती है. जब विदेशी बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर भारत जैसे स्थिर और मजबूत आर्थिक विकास वाले घरेलू बाजारों का रुख करते हैं. ऐसे में जो निवेश दुबई जाने वाला था, उसके अब भारत की ओर मुड़ने की संभावना बढ़ गई है। 

बाजार पर्यवेक्षकों का कहना है कि शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि दुबई, जो वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी वाला दूसरा सबसे बड़ा रियल एस्टेट मार्केट है, वहां लेन-देन पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. मौजूदा अनिश्चितता निवेशकों के भरोसे पर भारी पड़ रही है. बाजार में सावधानी का आलम यह है कि कुछ खरीदार अपनी खरीदारी को टाल रहे हैं और सौदों को पूरा होने में पहले से कहीं ज्यादा समय लग रहा है। 

मौजूदा अनिश्चितता निवेशकों के मनोबल को प्रभावित कर रही है. स्थिति यह है कि कई खरीदार फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं और जो सौदे अंतिम चरण में थे, उन्हें पूरा होने में भी अब काफी समय लग रहा है. यह निवेशकों के बेहद सतर्क रुख को दर्शाता है।