रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को रफ्तार, बड़े रनवे और नई हवाई सेवा से बिहार-नेपाल दोनों को फायदा
रक्सौल (पूच)
भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को लेकर शनिवार को बड़ी जानकारी सामने आई।
पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित एयरपोर्ट एवं तिलावे नदी क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद कहा कि रक्सौल एयरपोर्ट का रनवे पटना एयरपोर्ट से करीब 360 मीटर बड़ा होगा।
उन्होंने दावा किया कि यह एयरपोर्ट आकार और सुविधाओं के मामले में उत्तर बिहार का महत्वपूर्ण हवाई केंद्र बनेगा।
निरीक्षण के बाद एसएसबी मुख्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद ने कहा कि यदि सभी कार्य तय समयसीमा के अनुसार पूरे हुए तो अगले लगभग 20 महीनों में रक्सौल से हवाई सेवा शुरू हो सकती है।
बड़े विमानों की लैंडिंग के अनुरूप बनेगा रनवे
सांसद डॉ. जायसवाल ने बताया कि प्रस्तावित एयरपोर्ट का रनवे तिलावे नदी के उस पार तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि बड़े विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सके।
उन्होंने कहा कि बड़े रनवे के कारण विमानों को इमरजेंसी ब्रेकिंग की आवश्यकता कम पड़ेगी, जिससे एयरपोर्ट तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और आधुनिक होगा।
उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट निर्माण के लिए कुल 139 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष भूमि अधिग्रहण का कार्य भी तेजी से चल रहा है।
कंसल्टेंट चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है और अगले तीन महीनों में विस्तृत डिजाइन एवं तकनीकी नक्शा तैयार होने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सांसद ने कहा कि निर्माण एजेंसी को एयरपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद दो महीने तक तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानक जांच एवं ट्रायल लैंडिंग की प्रक्रिया चलेगी।
उत्तर बिहार और नेपाल सीमा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ
सांसद ने कहा कि रक्सौल एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर बिहार एवं भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के आर्थिक, व्यापारिक और पर्यटन विकास का नया केंद्र बनेगा।
एयरपोर्ट बनने से नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों, व्यापारियों एवं पर्यटकों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों को पटना जाकर विमान सेवा लेने की मजबूरी समाप्त होगी।
उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट परियोजना के साथ-साथ बेतिया-रक्सौल और मोतिहारी-रक्सौल फोरलेन सड़क परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र की कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
वर्ष 2016 में मिली थी स्वीकृति
डॉ. जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पीएम पैकेज के तहत एयरपोर्ट परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि भूमि अधिग्रहण एवं नीतिगत कारणों से परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। वर्ष 2023 में भूमि अधिग्रहण की अनुमति मिलने के बाद परियोजना ने गति पकड़ी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की पहल से रक्सौल का सपना अब साकार होता दिख रहा है।
सांसद ने कहा कि वर्ष 2026 रक्सौल और चंपारण के विकास के लिए विशेष वर्ष साबित होगा। उन्होंने बताया कि दो माह के भीतर रेलवे क्रॉसिंग संख्या 33 एवं 34 पर आरओबी निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। साथ ही रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे परियोजना को भी गति मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर रक्सौल विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा, नरकटिया विधायक विशाल कुमार, सुगौली के राकेश गुप्ता उर्फ बबलू गुप्ता, पूर्व विधायक उमाकांत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक कुमार पांडेय, एसडीओ मनीष कुमार, एसडीपीओ मनीष आनंद सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।
