मिशन 2027 की तैयारी शुरू: योगी कैबिनेट विस्तार से बदले सियासी समीकरण, 60 सीटों पर खास नजर
लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में होने हैं। इस तरह एक साल से भी कम का वक्त बचा है और भाजपा ने योगी कैबिनेट का विस्तार करने के बाद अब चुनाव पर फोकस कर दिया है। मंगलवार को हिमंत बिस्वा सरमा सरकार का शपथ समारोह है और उसके बाद भाजपा लीडरशिप तैयारी में जुट सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंगलवार के बाद किसी भी दिन यूपी चुनाव को लेकर भाजपा की अहम बैठक हो सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उन 50 से 60 सीटों पर फोकस करने के लिए कहा है, जहां पहले भाजपा नहीं जीत पाई थी।
ये वह सीटें हैं, जहां भाजपा को 2012 से 2022 तक के तीन चुनावों में जीत नहीं मिल सकी है। पार्टी लीडरशिप का कहना है कि यदि इन सीटों में से करीब आधी भी जीत ली गईं तो नतीजे बदल सकते हैं। भाजपा जिन 60 सीटों पर जोर देने की बात कर रही है, उनमें से 22 तो पूर्वांचल के आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर में हैं। इसके अलावा 13 सीटें पश्चिम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे जिलों में हैं। पश्चिम यूपी के इन जिलों में मुस्लिम बहुल आबादी वाली सीटों पर ऐसी स्थिति है। इसके अलावा पूर्वांचल के जिलों की बात करें तो सपा यहां मजबूत रही है। अब यदि भाजपा ने यहां फोकस किया तो वह अपने गढ़ों के अलावा कमजोर इलाकों में भी ताकत बढ़ा पाएगी।
समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में इन 35 सीटों में से 22 पर जीत हासिल की थी। पूर्वी यूपी के मऊ, गाजीपुर जैसे जिलों में सपा की झोली भर गई थी और इसी के चलते 2017 के मुकाबले वह अच्छी स्थिति में आ गई थी। इस बार भाजपा की प्लानिंग यह है कि सपा को उसके ही मजबूत इलाकों में घेरा जाए। मैनपुरी, फर्रूखाबाद, इटावा जैसे जिलों में भाजपा तैयारियों में जुट गई है। बता दें कि चुनाव की महीनों पहले से ही तैयारी करने में भाजपा आगे रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में भी वह महीनों पहले से ऐक्टिव थी और जब उसे सत्ता मिली है तो उसकी सक्रियता को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
क्यों बूथ लेवल रणनीति पर इतना फोकस करती है भाजपा
यूपी में भाजपा एक बार फिर से बूथ लेवल पर रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का कहना है कि बूथ लेवल पर फोकस करने से जमीनी स्तर तक कार्यकर्ता ऐक्टिव हो जाते हैं और वे वोटरों को घरों से निकालने में भी जुटते हैं। पहले के चुनावों में भी भाजपा को इस रणनीति का फायदा मिला है। अब नए तेवर और कलेवर के साथ एक बार फिर पार्टी इस रणनीति पर जुटने की तैयारी में है।
