बिहार सरकार का बड़ा फैसला, शहरों के विकास और रोजगार के लिए नई योजना
पटना
बिहार के शहरों को सुंदर, आधुनिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने केंद्र सरकार के 'अर्बन चैलेंज फंड' (यूसीएफ) मिशन में भागीदारी को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस खास मिशन के तहत अब बिहार के संबंधित नगर निकाय सीधे केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के साथ एमओयू कर सकेंगे। सरकार के इस कदम से बिहार के शहरी इलाकों में बुनियादी ढांचे का विकास करने, कमाई के नए जरिए ढूंढने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बहुत बड़ी मदद मिलने वाली है।
बिहार के हिस्से आए 2,900 करोड़ रुपए
इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड मिशन के लिए देशभर के शहरों को चमकाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की सहायता का प्रावधान किया है, जिसमें से बिहार के लिए पूरे 2,900 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। इस फंड से होने वाले कामों का पूरा पैसा सरकार अकेले नहीं देगी। किसी भी प्रोजेक्ट की कुल लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जो कुल मिलाकर 50 फीसदी होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आधी रकम तो सरकार दे देगी, लेकिन बाकी बची हुई आधी (50 प्रतिशत) राशि संबंधित नगर निकायों को ऋण, बॉन्ड अथवा अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से खुद ही जुटानी होगी।
लोन दिलाने के लिए हुडको को बनाया गया पार्टनर
नगर निकायों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और इस आधी रकम को जुटाने में सहायता के लिए भारत सरकार ने 'हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' (HUDCO) को नामित किया है, जिससे चयनित परियोजनाओं के लिए आसानी से लोन उपलब्ध कराया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन के तहत सिर्फ उन्हीं परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो नगर निकायों के लिए लंबे समय तक राजस्व का मजबूत स्रोत बन सकें। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से बिहार के नगर निकाय आत्मनिर्भर और वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनेंगे, जिससे राज्य के शहरों में योजनाबद्ध और टिकाऊ विकास को एक नई गति मिलेगी।
