Uddhav Camp Exit: पार्टी छोड़ते ही चमकी किस्मत, नेता ने जीता बड़ा चुनाव और बने विधान परिषद सदस्य (MLC)

मुंबई 

शिवसेना यूबीटी को लगातार दूसरे दिन झटका लगा है। पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में गए सचिन अहीर को बुधवार को विधान परिषद का उपसभापति चुन लिया गया था। खास बात है कि चुनाव से ठीक पहले ही उन्होंने दल बदल का ऐलान किया था, जिसके बाद शिवसेना ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। इससे पहले वह उद्धव गुट से एमएलसी थे।

अहीर सत्तारूढ़ महायुति के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध विधान परिषद के उपसभापति चुने गए हैं। उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, निवर्तमान उपसभापति नीलम गोरे और मंत्री चंद्रकांत पाटिल की उपस्थिति में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। दरअसल, महाविकास अघाड़ी प्रत्याशी जेएम अभ्यंकर ने अपना नामांकन वापस ले लिया था।

पहले एनसीपी में थे अहीर
अहीर का शिंदे खेमे में जाना उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनका जाना विशेष रूप से मुंबई के वर्ली निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी का कमजोर होना तय है। कहा जा रहा है कि यहां उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में एक मजबूत राजनीतिक और संगठनात्मक आधार तैयार किया है।

अहीर ने नब्बे के दशक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और बाद में वे अविभाजित शिवसेना में शामिल हो गए थे। उन्हें आदित्य ठाकरे का एक बेहद भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था।

अब विधायक टूटने की आशंका
वार्ता ने राजनीतिक विश्लेषकों के हवाले से बताया कि अहीर के पाला बदलने के बाद उद्धव गुट के विधायक भी बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

एजेंसी से बातचीत में सूत्रों ने बताया कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पिछले कुछ समय से अहीर को अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही थी और मुंबई उत्तर-पूर्वी के सांसद संजय दीना पाटिल के पार्टी में शामिल होने के बाद यह अटकलें और तेज हो गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें उपसभापति पद के लिए चुनाव लड़ने का आश्वासन दिया गया था, जिसके कारण उन्होंने शिंदे गुट में शामिल होने का निर्णय लिया।

6 सांसद छोड़ चुके साथ
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब हाल ही में उद्धव गुट से 6 सांसदों ने किनारा कर लिया है। ये सभी नेता एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को समर्थन दे रहे हैं। खास बात है कि अब शिवसेना यूबीटी के पास लोकसभा में महज 3 और राज्यसभा में 1 सांसद बचा है। वहीं, कहा यह भी जा रहा है कि जल्द ही 14 और विधायक भी टूट सकते हैं।

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